SIR ड्यूटी में BLO मौतें: क्या चुनावी सुधार बन रहा है मानव अधिकार संकट?

चुनावी कार्य में BLO की मौतें – मानव अधिकार मुद्दा
Source:Google Gemini

प्रस्तावना

भविष्य के चुनावों को मद्देनजर रखते हुए भारत में चुनाव आयोग द्वारा देशभर में SIR (Special Intensive Revision) कार्यक्रम का अभियान तेजी से चलाया जा रहा है | 

इस अभियान का उद्देश्य पुरानी मतदाता सूचियों को अद्यतन, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है | इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए BLOs की ड्यूटी लगाईं गई है | 

SIR के दौरान इन BLOs को मतदाता सूची अद्यतन के लिए लोगों के घर -घर जाकर मतदाताओं से सम्बंधित सूचनाएं का सत्यापन, उनके फॉर्म भरना, मृतकों के नामो को मतदाता सूची से हटाना, नामो को जोड़ना, डिजिटल मोड में एंट्री आदि के लिए लगाया गया है | 

लेकिन इस 2025 के SIR अभियान के दौरान कई भारतीय राज्यों से लगातार BLOs की मौत या आत्महत्यायों की ख़बरों ने राजनैतिक गलियारों तथा समाज में गंभीर चिंता की लहार पैदा कर दी है | 

इन घटनाओं ने चुनावी सुधार पर एक प्रश्न खड़ा कर दिया है | क्या वास्तव में यह अभियान लोकतंत्र को मजबूत कर रहा है या इसमें लगे BLOs के मानव अधिकारों पर ही कुठाराघात कर रहा है ?

आकस्मिक रूप से सामने आई यह समस्या एक गंभीर रूप धारण करती जा रही है, क्यों कि देश के विभिन्न भागों से इस तरह की घटनाओं की लगातार ख़बरें आ रही हैं | 

इस समस्या की तहतक जाकर इसे समझना और उसका तत्काल निराकरण करना राज्य और चुनाव आयोग के दायित्वाधीन है |  

 मीडिया के हवाले से कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं 

पश्चिम बंगाल के नादिया ज़िले के एक 51 वर्षीय व्यक्ति बूथ-स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) ने आत्महत्या कर ली। उसने एक सुसाइट नोट लिखा जिसमे अपनी आत्महत्या के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया गया | 

उसने कहा कि मैं इस काम के दबाव को बर्दाश्त नहीं कर सकती हूँ।मुझे ऑनलाइन काम के बारे में कुछ नहीं पता। उसने स्वयं को डिजिटल तकनीकी से अनभिज्ञ बताया | जिसके कारण वह उस काम को करने से पहले ही घबरा गई और उसने यह हैरान करने वाला फैसला लिया | 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अभी इसी महीने में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के पद पर तैनात 50 वर्षीय शिक्षा मित्र विजय कुमार वर्मा को ब्रेनहेमरेज हो गया जिनकी एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। 

बीएलओ की मृत्यु के बाद यूपी प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ का आरोप है कि SIR के कार्य को पूरा करने के लिए निर्धारित समय सीमा 4 दिसम्बर के कारण अत्यधिक तनाव के चलते उनका स्वास्थ्य खराब हुया और मृत्यु हो गई |

हालांकि, इस सम्बन्ध में लखनऊ जिला प्रशासन ने बीएलओ पर किसी भी अनुचित दबाव का खंडन किया है | लेकिन खबरों के अनुसार ब्रेनहेमरेज से उसकी मृत्यु की पुष्टि की है | 

गुजरात राज्य के गिर सोमनाथ जिले में अभी हाल ही में 40 वर्षीय सरकारी स्कूल शिक्षक अरविंद वढेर ने अपने घर के अंदर फांसी  लगा ली

वधेर ने अपनी पत्नी के लिए लिखे गए एक सुसाइड नोट में लिखा कि वह भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा शुरू किए गए SIR के लिए BLO की ड्यूटी के कारण तनाव में था। 

गुजरात के बड़ोदरा में 22 नवंबर,2025 को, एक सहायक बीएलओ, उषाबेन, की  भी ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो गई। 

द वायर हिंदी के हवाले से न्यूज़ क्लिक ने छापा कि, उनके परिवार ने उनके बिगड़ते स्वास्थ्य के बारे में “अधिकारियों को पहले ही आगाह” कर दिया था और उन्हें छूट देने की गुहार लगाई थी। 

बाबजूद इसके उन्हें बिना किसी परवाह के SIR ड्यूटी पर तैनात किया गया और आखिरकार उनकी मृत्यु हो गई | 

मध्य प्रदेश राज्य के शहडोल में 54 वर्षीय बीएलओ मनीराम नापित एक गांव में एसआईआर फॉर्म एकत्र कर रहे थे | 

इसी दौरान लंबित लक्ष्यों के बारे में पूछताछ ले लिए एक अधिकारी से फोन पर बातचीत हुई और कुछ ही मिनटों बाद बेहोश हो गए और उनकी मृत्यु हो गई  

NDTV की एक खबर के अनुसार मध्य प्रदेश में 10 दिनों में CIR अभियान के दौरान 6 BLOs /चुनाव अधिकारियों की मौत हो गई है | यह स्थति निश्चित रूप से चिंता का विषय है | 

यह समस्या मानव अधिकार का मुद्दा क्यों ?

भारत में विगत कुछ दिनों में BLO की लगातार हो रही मौतें तथा आत्महत्याएं सिर्फ संख्या का मामला नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय चिंता और मानव अधिकार का विषय है | 

यदि समय से इस समस्या की पहचान और उसके उचित उपचार के प्रयास नहीं किये जाते हैं तो यह मानव अधिकार उलंघन का मामला भी बन सकता है | 

यद्धपि अभी यह समस्या शुरुआती दौर में है | भारत ऐसे कई अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार घोषणाओं, सन्धियों और प्रसंविदायों का हस्ताक्षरकर्ता है, जिसके अनुसार सरकार दायित्वाधीन है कि वह बिना किसी भेदभाव के हर कर्मचारी को सुरक्षित, सम्मानजनक और कार्य की मानवीय परिस्थितियां मुहैया कराए |   

लेकिन SIR के दौरान देश भर से मीडिया के माध्यम से सामने आ रही घटनाओं से यह समस्या मानव अधिकारों के सुसंगत प्रतीत होती है | इसी लिए इस समस्या को मानव अधिकार का मुद्दा माना जा सकता है | 

समस्या के सुसंगत मानव अधिकार प्रावधान 

समस्या से सुसंगत मानव अधिकार प्रावधानों की एक लम्बी श्रंखला है, लेकिन इस लेख को सीमित रखने के उद्देश्य से यहाँ कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों का विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है | 

मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा,1948 

मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुछेद 3 तथा अनुछेद 23 BLO के अधिकारों से सुसंगतता रखते है | 

अनुछेद -3 

घोषणा के अनुछेद -3 के अनुसार हर व्यक्ति को जीवन, सुरक्षा और व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार है | मीडिया में प्रकाशित खबरों से यह पता चल रहा है कि SIR ड्यूटी के दौरान BLO द्वारा झेले जा रहे तनाव से उनकी मृत्यु या आत्महत्याएं हो रही हैं |

जिसका अर्थ है कि सरकार अपने कर्मचारियों को कार्य के दौरान बचाने में असमर्थ है तथा BLO कार्य की जोखिम भरी परिस्थतियों में कार्य करने को विवश हैं | 

इस समस्या के निराकरण की तत्काल आवश्यकता है | यद्धपि अभी तक सरकार की तरफ से इस प्रकार की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि BLOs की मौतें या आत्महत्याएं SIR ड्यूटी के दौरान जोखिम भरी कार्य की परिस्थितिओं का परिणाम है |  

अनुछेद -23 : सुरक्षित और मानवीय कार्य परिस्थितियां 

घोषणा का अनुछेद 23 कहता है कि हर श्रमिक को सुरक्षित और मानवीय कार्य की परिस्थितिओं का अधिकार प्राप्त है | 

BLO का तनाव भरी खतरनाक परिस्थितियों में कार्य करना घोषणा में दिए गए अनुछेद 23 के विरुद्ध है | राज्य को अपने BLO के लिए अनुछेद -3  और 23 के अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध करानी चाहिए | जिससे उनके किसी भी मानव अधिकार का उल्लंघन होने से रोका जा सके | 

नागरिक और राजनैतिक अधिकारों की अंतराष्ट्रीय प्रसंविदा, 1966 

भारत इस प्रसंविदा का हताक्षरकर्ता देश है, इस कारण इस प्रसंविदा के प्रावधानों का अनुपालन करने के लिए विधिक रूप से प्रतिबद्ध है | 

प्रसंविदा का अनुछेद -6 : जीवन का अधिकार 

उक्त प्रसंविदा के अनुछेद -6 के अनुसार राज्य का दायित्व होता है कि वह अपने नागरिकों की हर प्रकार के जोखिम से रक्षा करे | 

भारत में BLO की मौतों और आत्महत्यायों को रोकने के लिए समुचित उपायों की कमी राज्य के नागरिकों को बचाने के सकारात्मक दायित्व के उलंघन की श्रेणी में आएगा | 

सयुंक्त राष्ट्र मानवाधिकार कमेटी द्वारा जारी जनरल कमेंट संख्या -36 

इस दस्तावेज में कहा गया है कि राज्य का यह दायित्व है कि वह अपने कर्मचारियों को उन सभी कार्य सम्बन्धी जोखिमों से बचाये, जो उनकी मृत्यु का कारण बन सकते हैं | 

इस प्रकार BLO की ड्यूटी पर मौतें नागरिक और राजनैतिक अधिकारों की अंतराष्ट्रीय प्रसंविदायों की श्रेणी में समझी जाएगी, यदि राज्य द्वारा कार्य के दौरान हो रही मौतों और आत्महत्यायों को रोकने के लिए कोई उचित कदम नहीं उठाये जाते हैं | 

तो क्या हैं मानव अधिकार केंद्रित सुझाव ? 

विगत कुछ समय में हुई BLO मौतों को दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार द्वारा जल्द से जल्द BLO सुरक्षा और कल्याण नीतियों का निर्माण किये जाने की आवश्यकता है | ये नीतियां निम्नवत हो सकती हैं :-

1. SIR ड्यूटी के लिए आज्ञापक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल | इसके तहत किसी भी संवेदन और गंभीर बीमारी ग्रस्त व्यक्ति को ड्यूटी से मुक्त रखा जाना चाहिए | 

2. ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर बीमा तथा मुआवजा नीति | BLO की मृत्यु पर बिना किसी अनावश्य्क फोर्मलिटी के आर्थिक सहायता का प्रावधान किया जाना चाहिए | 

3. आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था का प्रावधान किया जाना चाहिए | 

4.  कार्य दबाब प्रबंधन की समुचित व्यवस्था का प्रावधान किया जाना चाहिए| 

5 . हर BLO को डिजिटल कार्य की ट्रेनिंग की व्यवस्था का प्रावधान किया जाना चाहिए | 

6 . डिजिटल वेरीफिकेशन पर अधिक बल दिया जाना चाहिए | 

निष्कर्ष 

वर्ष 2025 चुनाव आयोग द्वारा कराये जा रहे SIR के दौरान BLO की मौतों ,उनके स्वास्थ्य खराब होने की घटनाओं और उनकी आत्महत्यायों के अनेक मामले मीडिया द्वारा रिपोर्ट करने पर उजागर हुए हैं |

ये सभी घटनाएं चुनावी सुधार प्रक्रिया के दौरान घटी हैं | ये घटनाएं सिर्फ कुछ आँकड़ा भर नहीं हैं, बल्कि अत्यधिक गंभीर चेतावनी की ओर संकेत करती हैं | 

यह स्वास्थ्य के अधिकार और जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण मामला है न कि सिर्फ कुछ लोगों की संख्या का | राज्य अपने नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार के प्रति सदैव सचेत और प्रतिबद्ध रहता है | 

राज्य की SIR हेतु की जा रही पहल विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को मजबूत करने की पहल है तथा इसके लिए कार्य कर रहे BLOs ही इसे धरातल पर पहुंचा सकते हैं | 

वे इस SIR की रीढ़ की हड्डी हैं | यदि रीढ़ की हड्डी ही संकट में हो तो कितना भी मजबूत व्यक्ति सही ढंग से जीवन नहीं जी सकता है | 

इसलिए BLOs पर आये अभिकथित मानव अधिकार संकट को तत्काल पहचानने और समझने की आवश्यकता है, जिससे इस गंभीर समस्या का सही समय से इलाज किया जा सके | 

यदि हम सचमुच लोकतंत्र को मजबूती देना चाहते है तो इसको मजबूत करने के कार्य में लगे लोगों की समस्या को समझना और उन्हें संरक्षण देना राज्य के दायित्वाधीन है | 

भारत का चुनाव आयोग भी राज्य के अधीन है तथा निष्पक्ष चुनाव कराना उसकी जिम्मेदारी है, लेकिन लोकतंत्र को मजबूत बनाये रखने के लिए उसके मातहत कार्य करने वाले लोगों के मानव अधिकारों को समझने और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी से वह भाग नहीं सकता है | 

उम्मीद की जानी चाहिए कि चुनाव आयोग मीडिया के हवाले से आ रही BLOs की मौतों और आत्महत्याओं की खबरों पर  तत्काल संज्ञान लेगा और कोई न कोई मानव अधिकार केंद्रित समाधान अवश्य निकालेगा |  

Follow on LinkedIn

Comments

  1. अनाम अवतार
    अनाम

    बहुत ही उचित और सटीक विश्लेषण किया है डॉ साहब। ऐसे ही लेख समाज और प्रशासन को समय रहते सही कदम उठाने को प्रेरित करतें हैं। प्रशासन द्वारा हाल ही में बीएलओ की मदद के लिए उनके साथ कुछ सहायक स्टाफ को भी लगाया है जो सही कदम है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *