Passive Euthanasia in India: क्या Article 21 के तहत Right to Die with Dignity मान्य है?

Passive Euthanasia in India: Article 21 के तहत Right to Die with Dignity पर Supreme Court का कानूनी दृष्टिकोण
भारत में Passive Euthanasia और Right to Die with Dignity पर Supreme Court के महत्वपूर्ण निर्णय

परिचय

प्रत्येक व्यक्ति के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार एक महत्वपूर्ण अधिकार है |

समय के साथ -साथ इस अधिकार की सर्वोच्च न्यायालय में व्यापक व्याख्या हुई, जिसमे मानवीय गरिमा को जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण तत्व माना गया है |

इस अधिकार की व्यापकता के सन्दर्भ में एक जटिल प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आया कि क्या इस अधिकार में किसी व्यक्ति को गरिमा के साथ मृत्यु चुनने का अधिकार भी शामिल होना चाहिए ?

अभी हाल ही में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा Passive Euthanasia के सम्बन्ध में दिए गए निर्णय के साथ ही एक बहस छिड़ गई है |

यह मुद्दा केवल क़ानून तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें चिकित्सा- नैतिकता, संवैधानिक सिद्धांत और मानव अधिकार शामिल हैं |

भारत में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कई मामलों में Passive Euthanasia की परिस्थितियां और सीमाऐं स्पष्ट करने का प्रयास किया है |

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Euthanasia क्या होता है ?

Euthanasia का सामान्य भाषा में अर्थ है कि गंभीर बीमारी या असहनीय दर्द को झेल रहे किसी बीमार व्यक्ति की मृत्यु से है |

अर्थात किसी गंभीर बीमारी या असहनीय वेदना या पीड़ा से गुजर रहे किसी बीमार व्यक्ति की मृत्यु को जानबूझ कर या किसी प्रक्रिया के माध्यम से होने देना ताकि उसे ठीक न होने वाली बीमारी या असहनीय पीड़ा से मुक्ति मिल सके |

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Passive Euthanasia का उद्देश्य क्या है ?

Passive Euthanasia का उद्देश्य मुख्य रूप से ऐसे रोगियों को राहत देना है जो गंभीर बीमारी या असहनीय शारीरिक या मानसिक पीड़ा लम्बे समय से झेल रहे होते हैं तथा उनके भविष्य में ठीक होने की कोई भी संभावना नहीं होती है |

ऐसी स्थित में चिकित्सकों की राय, चिकित्सकीय -नैतिकता और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए Passive Euthanasia के लिए अनुमति लेनी होती है | जिससे इसका किसी भी तरह दुरूपयोग न हो सके |

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Euthanasia कितने प्रकार का होता है ?

Euthanasia को मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँटा गया है | पहला Active Euthanasia और दूसरा Passive Euthanasia |

(i)Active Euthanasia क्या होता है ?

Active Euthanasia से तात्पर्य है किसी गंभीर रूप से बीमार या असहनीय पीड़ा झेल रहे व्यक्ति की मृत्यु जानबूझ कर किसी प्रक्रिया द्वारा कराई जाती है |

उदाहरण के लिए घातक इंजेक्शन दे कर मृत्यु कराना Active Euthanasia के रूप में जाना जाता है |

(ii)Passive Euthanasia क्या होता है ?

इसके विपरीत Passive Euthanasia में गंभीर रूप से बीमार या असहनीय पीड़ा झेल रहे व्यक्ति को उसका जीवन बचाने के लिए लगाए गए जीवन -रक्षक प्रणाली (Life Saving Support) को हटा लिया जाता है |

जिसके कारण बीमार व्यक्ति की मृत्यु स्वाभाविक रूप में हो जाती है |

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निष्कर्ष :

भारतीय न्यायपालिका ने अत्यधिक संवेदनशील Passive Euthanasia के मुद्दे को हर परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया है, बल्कि कुछ विशेष परिस्थितियों में ही स्वीकार किया गया है |

पिछले एक दशक में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा किये गए निर्णयों में स्पष्ट किया गया है कि Passive Euthanasia अर्थात Right to Die with Dignity भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की व्यापक व्याख्या का हिस्सा हो सकता है |

यद्यपि यह अधिकार असीमित नहीं है, बल्कि तार्किक चिकित्सकीय और विधिक बाध्यताओं के अधीन है, जिसमे चिकित्सकीय राय, सख़्त कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक निगरानी अत्यधिक आवश्यक होती है |

इस मामले में भारतीय न्याय व्यवस्था ने अत्यधिक संतुलित रूख अपनाया है तथा सरकार को इस सम्बन्ध में क़ानून बनाने का निर्देश भी दिया है |

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ):

प्रश्न 1. Passive Euthanasia क्या होता है ?

उत्तर : Passive Euthanasia एक प्रक्रिया है जिसमे किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को जीवित बनाये रखने वाले चिकित्सा उपकरणों या life support system को हटा लिया जाता है, जिससे बीमार व्यक्ति की प्राकृतिक रूप से मृत्यु हो जाती है |

प्रश्न 2 . Passive Euthanasia उद्देश्य क्या होता है ?

उत्तर : Passive Euthanasia उद्देश्य गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को असहनीय तकलीफ या पीड़ा से मुक्ति देना होता है |

प्रश्न 3 .क्या भारत में Passive Euthanasia कानूनी है ?

उत्तर : हाँ | भारत में कुछ परिस्थितयों में Passive Euthanasia को सर्वोच्च न्यायालय ने अनुमति दी है तथा इस सम्बन्ध में दिशा निर्देश जारी किये हैं | |

प्रश्न 4 . Active Euthanasia और Passive Euthanasia में क्या अंतर है ?

उत्तर : Active Euthanasia में किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति की मृत्यु जानबूझ कर उसे घातक इंजेक्शन देकर या किसी अन्य प्रक्रिया द्वारा कराई जाती है | जबकि Passive Euthanasia में गंभीर बीमारी या असहाय पीड़ा झेल रही व्यक्ति को जीवित बनाये रखने के लिए उपलब्ध कराये गए जीवन रक्षक उपचार को हटा लिया जाता है जिससे उसकी प्राकृतिक मृत्यु हो जाती है |

प्रश्न 5 . क्या Right to Die with Dignity का सिद्धांत भारत में लागू है ?

उत्तर :हाँ | माननीय उच्च न्यायालय ने Right to Die with Dignity के सिद्धांत कुछ सीमित परिस्थितियों में अनुमति दी है तथा इसे Article 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार की व्यापक व्याख्या में शामिल किया गया है |

प्रश्न 6 . क्या परिवार को Passive Euthanasia का निर्णय लेने का अधिकार है ?

उत्तर : हाँ | यदि मरीज़ ऐसी स्थिति में है कि वह स्वयं निर्णय लेने की स्थित में नहीं है तो परिवार चिकित्सकों की सलाह के आधार पर न्यायालय की प्रक्रिया का पालन करते हुए निर्णय लिया जा सकता है |

प्रश्न 7 .क्या Passive Euthanasia का दुरूपयोग हो सकता है ?

उत्तर : Passive Euthanasia का दुरुपयोग न हो सके इसी लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सख़्त दिशा निर्देश जारी किये गए हैं | जैसे कि अस्पताल की पुष्टि, चिकित्सा बोर्ड की राय तथा कानूनी प्रक्रिया का उचित पालन अनिवार्य है |

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अस्वीकरण :

यह लेख केवल शैक्षणिक और जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |

Note: Image credit: AI-generated illustration (created with ChatGPT)

 लेखक

Dr Raj Kumar
Founder- HumanRightsGuru / LawVsReality

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