
परिचय
विगत कुछ वर्षों में आपराधिक न्याय प्रणाली में Forensic Science की भूमिका तेजी से बढ़ी है | सरकार द्वारा नए कानूनों विशेषकर BNSS 2023 में भी Forensic Science की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है |
पूर्व में अपराधों की जांच मुख्य रूप से प्रत्यदर्शी साक्षी तथा पारिस्थितिकी जन्य साक्ष्य पर आधारित थी, लेकिन आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली में Forensic Science तकनीकों का उपयोग करके अपराधों की सच्चाई का पता लगाना आसान और अधिक विश्वशनीय हो गया है |
आज Forensic Science की भूमिका के कारण न सिर्फ सही अपराधियों को सजा दिलाने में मदद मिलती है, बल्कि निर्दोष व्यक्तियों को झूठे आरोपों से बचाती है |
इस प्रकार Forensic Science की भूमिका मानव अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है |
आज न्यायालयिक विज्ञान के महत्वपूर्ण घटक के रूप में DNA परीक्षण, Fingerprint विश्लेषण, Ballistics और Digital साक्ष्य जैसी वैज्ञानिक तकनीकों ने अपराध जांच को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बना दिया है |
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Forensic Science द्वारा अपराधियों की सटीक पहचान
आतंकवाद, डकैती और ह्त्या जैसे जघन्य अपराधों या आपदा दुर्घटनाओं में अक्सर मौके पर कोई चच्छुदर्शी गवाह उपलब्ध नहीं होता है | ऐसी परिस्थितियों में न्यायालयिक विज्ञान के अंतर्गत विकसित वैज्ञानिक औजार जैसे कि DNA Analysis, Fingerprint Identification और Face Recognition तकनीकों आदि के माध्यम से अपराधियों की सटीक पहचान संभव हो पाती है |
यही नहीं अनेक गंभीर दुर्घटनाओं में मानवीय शरीर की पहचान दुर्घटना के कारण हुए विकृत शरीर के कारण संभव नहीं होती है |
इन स्थतियों में भी DNA परीक्षण का सहारा लेकर मृतक व्यक्ति की सटीक पहचान की जाती है | उदाहरण स्वरुप गुजरात में हुई हवाई दुर्घटना में मृतक शवों की पहचान DNA परीक्षण द्वारा करना संभव हुया |
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गुजरात विमान दुर्घटना (जून 2025) और Forensic Science की महत्वपूर्ण भूमिका: एक महत्वपूर्ण उदाहरण
जून 2025 में गुजरात में एयर इंडिया के एक विमान के उड़ने के कुछ ही समय बाद हुई दुर्घटना में न्यायालयिक विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका उजागर हुई है |
विमान दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि विमान में क्रू सदस्यों सहित कुल सवार 242 लोगों में से 241 की बुरी तरह आग से जलने से मृत्यु हो गई थी |
दुर्घटना में सिर्फ एक व्यक्ति जीवित बचा था, जिसे गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था |
यात्रियों की राष्ट्रीयता सम्बन्धी आँकड़े
इस दुर्घटना में सवार यात्रियों में कई देशों के नागरिक शामिल थे जो निम्नवत हैं :
169 भारतीय नागरिक
53 ब्रिटिश नागरिक
7 पुर्तगाली नागरिक
1 कनाडाई नागरिक
रिपोर्ट के अनुसार एक मात्र बचा जीवित व्यक्ति भारतीय मूल का ब्रिटिश नागरिक था |
मृतकों के शवों की पहचान की चुनौती
विमान दुर्घटना के बाद विमान में लगी भीषण आग और विमान में हुए विस्फोट के कारण अधिकाँश शव बुरी तरह जल गए तथा छत-विछत हो गए थे |
ऐसी स्थति में शवों को पहचानने के सामान्य तरीके किसी काम के नहीं थे तथा उनसे पहचान संभव नहीं थी |
इस लिए न्यायालयिक विज्ञान के महत्वपूर्ण औजार के रूप में DNA परीक्षण को शवों की पहचान के मुख्य साधन के रूप में अपनाया गया | परिणाम स्वरुप अधिकांश शवों की पहचान कर ली गई |
Forensic Science की यही विश्वस्नीयता न्यायालय के समक्ष पुख्ता और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है |
निर्दोष व्यक्तियों की सुरक्षा
Forensic Science का उपयोग करके किये जाने वाले परीक्षण प्रामाणिक माने जाने के कारण न्यायालयों में विश्वसनीय साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होते हैं, यदि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के अनुसरण में किया गया है |
यही कारण है कि आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली में न्यायालयिक विज्ञान ने महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है |
अनेक आपराधिक मुकदद्मों में DNA परीक्षण, Fingerprint विश्लेषण तथा अन्य Forensic Science तकनीकों से यह साबित हुया है कि जिस व्यक्ति पर गंभीर अपराध के आरोप लगाए गए थे, वे झूठे और मनगढंत निकले | बाद में वह व्यक्ति निर्दोष निकला |
इस प्रकार न्यायालयिक विज्ञान तकनीकों के उपयोग ने असंख्य आरोपितों को, जिनके ऊपर झूठे आरोप लगाए गए थे, निर्दोष साबित कराने में अहम् भूमिका अदा की है |
इस लिए कहा जा सकता है कि आपराधिक न्याय व्यवस्था में Forensic Science मानव अधिकारों की रक्षा करके विशेष रूप से निर्दोष व्यक्तियों के अधिकार को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |
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न्यायालय में विश्वसनीय साक्ष्य की प्रस्तुति
आधुनिक न्याय प्रणाली में Forensic Science का मुख्य उद्देश्य मुकदद्मे के सम्बन्ध में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए उच्च गुणवत्ता के वैज्ञानिक और विश्वसनीय प्रामाणिक साक्ष्य उपलब्ध कराना है |
पारम्परिक जांच व्यवस्था में प्रत्यदर्शी गवाह और परिस्थिजन्य साक्ष्य को अधिक महत्व दिया जाता रहा है |
लेकिन Forensic Science की आधुनिक न्याय प्रणाली में महत्व के चलते प्रत्यदर्शी गवाह और परिस्थिजन्य साक्ष्य के साथ -साथ जांच की गुणवत्ता और प्रमाणिकता बढ़ने से वह अधिक सटीक और निष्पक्ष हो जाती है |
क्योंकि सत्य की खोज ही Forensic Science का मुख्य उद्देश्य है |सर्वोच्च न्यालय द्वारा दिए गए एक निर्णय Jaspal Singh vs State ,AIR 1979 SC 1708 में स्थापित किया गया है कि “फिंगरप्रिंग पहचान का विज्ञान किसी गलती एवम संदेह को नहीं स्वीकार करता है |”
उदाहरण के लिए आवश्यकता अनुसार न्यायालयिक विज्ञान के विभिन उपकरणों का उपयोग करते हुए अपराध स्थल से प्राप्त साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाता है |
इन परीक्षणों से प्राप्त रिपोर्ट न्यायालय को मानवाधिकार केंद्रित निर्णय लेने के लिए प्रेरित करते हैं | इस लिए न्यायालयिक विज्ञान न्याय प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी,और विश्वसनीय बनाता है |
जिसके यह सुनिश्चित होता है कि वास्तविक अपराधियों को दण्ड मिले और निर्दोषों को न्याय मिले |
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आपराधिक अन्वेषण में पारदर्शिता और निष्पक्षता
हमेशा से आपराधिक न्याय व्यवस्था का उद्देश्य सत्य की खोज करना तथा न्याय दिलाना रहा है |
इस महत्वपूर्ण लक्ष्य की पूर्ती के लिए विवेचना और जांच प्रक्रिया का निष्पक्ष और पारदर्शी होना बहुत आवश्यक है |
यदि जांच प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण या अपारदर्शी हो, तो न केवल वास्तविक अपराधी दंड से बच जायेगे, बल्कि निर्दोष व्यक्ति बिना किसी अपराध के किये हुए सजा भुगतने के लिए मजबूर होंगे |
इस लिए आपराधिक अन्वेषण या जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता अत्यधिक आवश्यक है |
हर आरोपित को निष्पक्ष जांच और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार में समाहित है |
यदि जांच संस्थाएँ जांच में निष्पक्ष और पारदर्शिता नहीं अपनाते हैं तो यह आरोपित के मानव अधिकारों का उल्लंघन होगा |
जांच की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता न सिर्फ आपराधिक न्याय व्यवस्था पर आम आदमी के भरोसे और विश्वास के लिए आवश्यक है, बल्कि मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाये रखने के लिए भी आवश्यक है |
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Forensic Science कैसे मानव अधिकारों की रक्षा और न्याय सुनिश्चित करती है?
Forensic Science वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और विश्लेषण के द्वारा पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की परिस्थितियां उपलब्ध कराती है | जिससे न्यायालय उसके समक्ष प्रत्यक्षदर्शी साक्षी उपलब्ध न होने की स्थति में भी न्याय कर सकता है |
न्यायालयिक विज्ञान के उपयोग के कारण उपलब्ध साक्ष्य के कारण विवेचना में हेरा -फेरी की गुंजाइशें करीब -करीब समाप्त हो जाती हैं | इसके कारण विवेचना में लगे लोगों पर भी अनावश्यक राजनैतिक दबाब भी समाप्त हो जाता है, बशर्ते विवेचना में कोई दुराग्रह जानबूज कर न किया जाए |
इस प्रकार न्यायालयिक विज्ञान आपराधिक मामलो में निष्पक्ष सुनवाई और न्याय के अधिकार की रक्षा में योगदान देकर मानव अधिकारों की रक्षा और न्याय सुनिश्चित करती है |
निष्पक्ष जांच और न्याय का अधिकार
भारतीय न्याय प्रणाली में हर व्यक्ति को निष्पक्ष जांच और सुनवाई का अधिकार प्राप्त है | यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वंत्रता के अधिकार में शामिल है |
Forensic Science के माध्यम से जांच एजेंसियां प्रमाणित वैज्ञानिक साक्ष्य न्यायलय के समक्ष उपलब्ध कराती हैं, जिससे न्यायालय तथ्यों के आधार पर निर्णय लेकर निष्पक्ष जांच और न्याय के अधिकार की अवधारणा को मजबूत करते हैं |
फोरेंसिक विज्ञान से संबंधित शोध और प्रशिक्षण के लिए National Forensic Sciences University महत्वपूर्ण संस्था है।
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निष्कर्ष :
भारत में नए कानून लागू होने के बाद आपराधिक न्याय व्यवस्था में न्यायालयिक विज्ञान की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गई है |
नए कानूनों में Forensic Science तथा Digital Evidence को बहुत महत्व दिया गया है |
आपराधिक जांच की वैज्ञानिक तकनीकों जैसे कि DNA परीक्षण, फिंगरप्रिंट विश्लेषण, बैलिस्टिक परीक्षण, विसरा जांच, Digital Forensic आदि ने साक्ष्य विहीन आपराधिक घटनाओं में भी आपराधिक अन्वेषण को अधिक सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया है |
Forensic Science की इन आधुनिक तकनीकों से न सिर्फ अपराधियों की सटीक पहचान होती है, बल्कि निर्दोष व्यक्तियों को भी झूठे मुकदद्मों होने वाली गलत सजा से बचाया जा सकता है |
मानव अधिकार सन्दर्भ में भी न्यायालयिक विज्ञान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है | न्यायालयिक विज्ञान की मदद से इखट्टा किये गए साक्ष्य तथा विश्लेषण के बाद आये निष्कर्ष के रूप में वैज्ञानिक साक्ष्य जांच एजेंसियों को उनके ऊपर पड़ने वाले दबाबों से बचाती हैं |
जिससे जांच एजेंसियों को निष्पक्ष तथा वैज्ञानिक- प्रमाण आधारित विवेचना को आगे बढ़ाने तथा अंतिम निष्कर्ष वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में न्यायालय के सामने प्रस्तुत करने में मदद मिलती है |
इससे न्याय प्रक्रिया भी दूषित नहीं होती है तथा पारदर्शिता, निष्पक्षता और न्याय की सुचिता सुनिश्चित हो पाती है |
अन्य शब्दों में न्यायालयिक विज्ञान मानव अधिकार संरक्षण और संवर्धन में प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है |
हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि न्यायालयिक विज्ञान का उपयोग किसी दुराग्रह के तहत नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग संवैधानिक और मानवाधिकार दायरे में किया जाना चाहिए |
यदि Forensic Science का उपयोग संवैधानिक और मानव अधिकार दायरे में कीया जाता है, तो यह न सिर्फ वास्तविक अपराधियों को दण्डित करने में अत्यधिक कारगर होगा, बल्कि निर्दोष व्यक्तयों के मानव अधिकारों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा |
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Forensic Science और मानव अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1 .Forensic Science क्या है ?
उत्तर: Forensic Science एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिमे विभिन्न तरीकों का उपयोग करके अपराध से जुड़े वास्तविक तथ्यों का सटीकता से पता लगाया जाता है | इसका उद्देश्य सत्य की खोज करना है तथा न्यायालय के समक्ष वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत करना है |
प्रश्न 2: अपराध जांच में DNA परीक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: आजकल अपराधियों का सटीकता से पहचान करने का सबसे बेहतर वैज्ञानिक तरीका DNA परीक्षण है | यह कई मामलों में गलत सजा से बचाव का भी बेहतरीन उपाय है |
प्रश्न 3: क्या Forensic Science मानव अधिकारों की रक्षा में सहायक है?
उत्तर: हाँ। Forensic Science अपराध जांच को वैज्ञानिक और निष्पक्ष बनाती है | इससे निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा होती है तथा अपराधियों को दंड दिलाने में सहायक है |
प्रश्न 4: क्या वैज्ञानिक परीक्षण बिना सहमति के कराए जा सकते हैं?
उत्तर: कुछ मामलों में उत्तर हां है लेकिन कुछ मामलो में उत्तर नकारात्मक भी हो सकता है | नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ और ब्रेन मैपिंग जैसे परीक्षण बिना सहमति के कराना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
प्रश्न 5: भारत में Forensic Science सबसे अधिक उपयोग कहाँ होता है?
उत्तर: भारत में Forensic Science का सबसे अधिक उपयोग हत्या, बलात्कार,आतंकवाद, साइबर अपराध, और बड़े आपदा मामलों में होता है।
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अस्वीकरण
यह लेख केवल शैक्षणिक और विधिक जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |
Note: Image credit: AI-generated illustration (created with ChatGPT)
लेखक
Dr Raj Kumar
Founder- Human Rights Guru / Law Vs Reality
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